150+ Chhatrapati Shivaji Maharaj Quotes in Hindi

Chhatrapati Shivaji Maharaj Quotes In Hindi: दोस्तों आज के इस लेख में हम छत्रपति शिवाजी महाराज के अनमोल विचार हिंदी आपके लिए लेके आए हैं। इस तरह की छत्रपति शिवाजी महाराज के अनमोल विचार आपको और कही नहीं मिलेंगे। उम्मीद करते है की आपको हमारा छत्रपति शिवाजी महाराज के अनमोल विचार पसंद आएगा।

Chhatrapati Shivaji Maharaj Quotes in Hindi

Chhatrapati Shivaji Maharaj Quotes in Hindi

जो इंसान समय के कुचक्र में पूरी तरह से,
शिद्दत से अपने कामो में लगा रहता है,
उस इंसान के लिए समय अपने आप बदल जाता है।

कोई भी कार्य करने से पहले उसका परिणाम सोच लेना हितकर होता है,
क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ी उसी का अनुसरण करती है।

सर्वप्रथम राष्ट्र, फिर गुरु, फिर माता-पिता, फिर परमेश्वर,
अतः पहले खुद को नही राष्ट्र को देखना चाहिए।

दुनिया में हर एक व्यक्ति को स्वतंत्र,
रहने का पूरा अधिकार है और उस,
अधिकार को पाने के लिए वह,
किसी से भी लड़ सकता है,
छत्रपति शिवा जी महाराज।

हिंदुओं की शान,
मराठा साम्राज्य का मान,
छत्रपति शिवाजी हैं,
राष्ट्र का अभिमान।

अगर मनुष्य के पास आत्मबल है,
तो वो समस्त संसार पर अपने हौसले से,
विजय पताका लहरा सकता है।

जय भवानी जय शिवाजी,
सर्वप्रथम राष्ट्र,फिर गुरु,
फिर माता-पिता,फिर परमेश्वर अत,
पहले खुद को नहीं राष्ट्र को देखना चाहिए।

शत्रु को कमजोर न समझो,
तो अत्यधिक बलिष्ठ समझकर डरना भी नहीं चाहिए।

इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए,
क्योंकि दिन और रात की तरह ही अच्छे दिनो को भी बदलना ही पड़ता है।

यदि एक पेड़, जोकि इतनी उच्च जीवित सत्ता नहीं है,
इतना सहिष्णु और दयालु हो सकता है,
कि किसी के द्वारा मारे जाने पर भी उसे मीठे आम दे,
तो एक राजा होकर,
क्या मुझे एक पेड़ से अधिक सहिष्णु और दयालु नहीं होना चाहिए?

आप एक छोटे कदम से, छोटे से लक्ष्य की,
शुरुआत करके भी बड़े बड़े लक्ष्य,
को आसानी से पा सकते है।

इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए,
क्योकी दिन और रात की तरह अच्छे दिनो को भी बदलना पङता है।

एक सफल मनुष्य अपने कर्तव्य की पराकाष्ठा के लिए,
समुचित मानव जाति की चुनौती स्वीकार कर लेता है।

ऐसी दौलत ही क्या मिलेगी,
बादशाह के खज़ाने में,
जो मैंने पाई है छत्रपती के,
सामने सिर झुकाने में।

एक पुरुषार्थी भी एक तेजस्वी विद्वान के सामने झुकता है,
क्योंकि पुरुर्षाथ भी विद्या से ही आती है।

किसी भी लक्ष्य को पाने के,
लिए नियोजन महत्वपूर्ण,
होता है। केवल नियोजन से,
ही आप लक्ष्य पा सकते हैं।

खुद की गलती से सीखने की जरूरत नहीं है,
हम दूसरों की गलतियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं।

अपने आत्मबल को जगाने वाला,
खुद को पहचानने वाला और मानव जाति,
के कल्याण की सोच रखने वाला,
पूरे विश्व पर राज्य कर सकता है।

बिना रुके हर कठिनाई में कदम बढ़ाना,
आसान नहीं है, मातृभूमि पर शीश चढ़ाना।

इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए,
क्योकी दिन और रात की तरह अच्छे दिनो को भी बदलना पङता है।

इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए,
क्योकी दिन और रात की तरह अच्छे दिनो को,
भी बदलना पङता है।

जरुरी नही की दुश्मन से लड़कर ही जीत हासिल की,
जाए बल्कि कूटनीति द्वारा बिना,
उससे लड़े भी जीत हासिल की जा सकता है।

भले हर किसी के हाथ में तलवार हो,
यह इच्छाशक्ति है जो एक सत्ता स्थापित करती है।

शत्रु चाहे कितना ही बलवान क्यो न हो,
उसे अपने इरादों और उत्साह मात्र से भी परास्त किया जा सकता है।

प्रतिशोध की भावना मनुष्य को जलाती रहती है,
सिर्फ संयम ही प्रतिशोध को काबू करने का एक उपाय हो सकता है।

जरुरी नही कि विपत्ति का सामना,
दुश्मन के सम्मुख से ही करने मे वीरता हो,
वीरता तो विजय मे है।

कभी भी अपना सर नही झुकाना चाहिए,
बल्कि हमेसा ऊचा ही रखना चाहिए।

आत्मविश्वास शक्ति प्रदान करता है,
और शक्ति ज्ञान प्रदान करती है,
ज्ञान स्थिरता प्रदान करता है,
और स्थिरता जीत की ओर ले जाती है।

भले हर किसी के हाथ में तलवार हो,
यह इच्छाशक्ति है जो एक सत्ता स्थापित करती है।

जब आप उत्साही होते हैं,
तो पहाड़ भी मिट्टी के ढेर जैसा दिखता है।

मनुष्य को प्रतिशोध लेने की,
भावना अंदर ही अंदर जलाती रहती है,
लेकिन इस पर संयम से प्रतिशोध,
पर काबू पाया जा सकता है।

अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए,
आप हर उस व्यक्ति को वचन दो जिनकी आपको जरूरत है,
परंतु सिर्फ महात्मा, संत लोगों को ही दिए वचन पूरे करो चोरों को दिए हुए नहीं।

जरूरी नही कि विपत्ति का सामना,
दुशमन के मममुख से ही करने मे,
वीरता हो, वीरता तो विजय मे है,
शत्रु चाहे कितना ही बलवान क्यो न हो,
उसे अपने इरादों और उत्साह,
मात्र से भी परास्त किया जा सकता है।

एक पुरुषार्थी भी, एक विद्वान के सामने झुकता है,
क्योंकि पुरुषार्थी भी विद्या से ही आती है।

जीवन में सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए,
क्योंकि दिन और रात की तरह अच्छे दिनों को भी बदलना पड़ता है।

नारी के सभी अधिकारों में,
सबसे महान अधिकार माँ बनने का है।

जिनकी वीरता का लोहा मुगलों ने भी माना,
ऐसे वीर छत्रपति शिवाजी को सर्वजगत ने जाना,
प्रेरणादायक है उनका जीवन हर एक हिंदू शासक को,
जो अंत तक लड़ता रहा लेकिन, दुश्मनों से नहीं हारा।

जो मनुष्य समय के कुच्रक मे भी पूरी शिद्दत से,
अपने कार्यो मे लगा रहता है। उसके लिए समय खुद बदल जाता है।

सर्वप्रथम राष्ट्र, फिर गुरु, फिर माता-पिता,
फिर परमेश्वर अतः पहले खुद को नही राष्ट्र को देखना चाहिए।

उत्साह मनुष्य की ताकत, संयम और अडिकता होती है,
सब का कल्याण मनुष्य का लक्ष्य होना चाहिए,
तो कीर्ति उसका फल होगा।

जब लक्ष्य जीत की हो, तो हासिल करने के लिए,
कितना भी परिश्रम,
कोई भी मूल्य क्यों न हो उसे चुकाना ही पड़ता है।

अगर मनुष्य के पास आत्मबल है,
तो वो समस्त संसार पर अपने हौसले,
से विजय पताका लहरा सकता है।

शत्रु चाहे कितना ही बलवान क्यो न हो,
उसे अपने इरादों और उत्साह मात्र से भी परास्त किया जा सकता है।

अंगूर को जब तक न पेरो वह मीठी मदिरा नहीं बनती,
वैसे ही मनुष्य जब तक कष्ट में पिसता नहीं,
तब तक उसके अन्दर की सर्वोत्तम प्रतिभा बाहर नहीं आती।

जब तुम्हारे हौसले बुलंद होंगे तो पहाड़,
जैसी मुसीबतें और संघर्ष भी मिट्टी के ढेर,
के समान ही प्रतीत होगा।

ओम” कहने से मन को शक्ति मिलती है,
साईं” कहने से मन को शक्ति मिलती है,
राम” बोलने से पापों से मुक्ति मिलती है,
जयँ शिवराय” की बात हमें सौ बाघों की ताकत,
मिलती है।

शिवाजी ने कसम थी दिलाई,
अपनी माटी के लिए हम मर मिटे,
शीश कट जाएं मंज़ूर है लेकिन,
मुगलों के आगे शीश न झुके।

आजादी एक वरदान है,
जिसे पाने का अधिकार हर इंसान को होता है।

दुश्मनों के आगे जिनके शीश नहीं झुकते हैं,
वही अपना इतिहास,
स्वर्णिम अक्षरों में लिखते हैं।

किसी भी चीज को,
पाने का हौसला बुलंद हो,
तो पर्वत को भी मिट्टी में,
बदला जा सकता है।

मातृभूमि से है गहरा नाता,
शिवाजी महाराज की है यह गाथा,
बाल शिवाजी को माता जीजाबाई ने,
देश प्रेम का ज्ञान दिया,
वीर शिवाजी के पिता ने,
रण कौशल का ज्ञान दिया।

वर्णन करें क्या शौर्य वीर का,
इतिहास खुद सब कुछ बतलाता है,
मातृभूमि के इस सिंह की हुंकार मात्र ही,
शंखनाद कहलाता है।

जो धर्म, सत्य, श्रेष्ठता और परमेश्वर के सामने झुकता है,
उसका आदर समस्त संसार करता है।

उत्साह मनुष्य की ताकत, संयम और अडिगता से प्रदर्शित होता है,
सब का कल्याण मनुष्य का लक्ष्य होना चाहिए,
तो कीर्ति उसका फल होगा।

शूरवीरों की यह धरती,
छत्रपति शिवाजी पालनहार,
बुराई जिससे कोसों दूर भागे,
ऐसी गूंजी है हुंकार।

किसी भी कार्य को करने से पहले उसके परिणाम को,
सोच लेना भी बेहतर होता है क्योकि,
आने वाली पीढ़ी आपका ही अनुसरण करती है।

हिंदुत्व की पहचान शिवाजी,
स्वराज का दूसरा नाम शिवाजी,
देश का अभिमान शिवाजी,
राष्ट्र की है शान शिवाजी।

बदला लेने की भावना मनुष्य को जलाती रहती है,
संयम ही प्रतिशोध को काबू करने का एक मात्र उपाय है।

शक्तिशाली मुगल भी कांपते थे,
जब युद्ध भूमि में शिवाजी सम्मुख आते थे।

समाज के लिए लड़ो,लड़ नही सकते तो बोलो,
बोल नही सकते तो लिखो,लिख नही सकते तो साथ दो,
साथ भी नही दे सकते तो,जो लिख, बोल और लड़ रहे है,
उनका मनोबल बढ़ाओ,ये भी नही कर सकते हो,
कम से कम उनका मनोबल तो मत गिराओ,
क्योंकि वो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे है।

जब लक्ष्य जीत का हो,
तो प्राप्त करने के लिए,
कितना भी परिश्रम हो,
कोई भी मूल्य क्यों ना हो,
उसे चुकाना ही पड़ता है।

उत्तर से दक्षिण तक स्वयं विजय ने,
केसरिया ध्वज फहराया है,
बाजीराव हो या वीर शिवाजी,
विजय ने नतमस्तक होकर सिर झुकाया है।

वीर शिवाजी सिर्फ एक नाम नहीं है,
यह वीरता की अमर कहानी है,
वह भारत के वीर क्षत्रिय जीत की,
एक अमिट निशानी है।

बुलंद हौसलों की ऊंचाई आसमान से भी अधिक होती है,
यदि एक व्यक्ति चाहे तो अपने हौसले के दम पर आसमान को झुका सकता है।

सर्वप्रथम राष्ट्र, फिर गुरु, फिर माता-पिता,
फिर परमेश्वर अत पहले खुद को नही राष्ट्र को देखना चाहिए।

धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व,
न्योछावर करने की भावना,
आपको महान बनाती है,
इस भावना का विश्वास,
आपके पुरुषार्थ से आता है।

कुछ अन्य हिंदी कोट्स:

  1. Suvichar in Hindi
  2. Education Quotes in Hindi
  3. Sacchi Baaten
  4. Chai Quotes in Hindi
  5. Punyatithi Quotes in Hindi

उम्मीद करते है की, आपको यह हमारा छत्रपति शिवाजी महाराज के अनमोल विचार आपको जरूर पसंद आया होगा। आप हमारा यह लेख अपने मित्रो के साथ साझा कर सकते है।

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